गुरुवार, 2 मार्च 2017

👉 प्रधान मंत्री की सादगी

🔴 यूनान के एक राजदूत ने भारत के प्रधान मंत्री चाणक्य की विद्वता, कूटनीतिज्ञता तथा सादगी की बात सुनी तो उनसे भेंट करने चल पडा। चाणक्य की कुटिया गंगा किनारे थी। वह राजदूत तलाश करता हुआ गंगा तट पर पहुँचा, उसने देखा कि एक बलिष्ठ व्यक्ति गंगा में नहा रहा है। थोडी ही देर में वह निकला, उसने पानी का एक घडा अपने कंधे पर रखा और चल दिया।

🔵 राजदूत ने पूछा- 'क्यों भाइ! मुझे चाणक्य के निवास स्थान का पता बताओगे।' उसने घास-फूस से निर्मित कुटी की ओर हाथ का संकेत कर दिया। राजदूत को बडा आश्चर्य हुआ कि मैंने तो प्रधान मंत्री का निवास पूछा और इसने तो कुटिया की ओर इशारा कर दिया। क्या इतने बड़े देश का प्रधानमंत्री इस कुटिया में रहता है। ऐसे विचार उसके मन में आते रहे।

🔴 पहले उस राजदूत ने गंगा स्नान करना उचित समझा, फि वह उसी कुटी पर पहुँचा। कुटी के बाहर से उसने देखा कि थोडे़ से बरतन रखे हैं। एक किनारे पर जल का वही घडा जो गंगा में से अभी भरकर आया था। एक खाट और मोटे-मोटे ग्रंथों का छोटा संग्रह।

🔵 "मैं प्रधान मंत्री चाणक्य से भेंट करना चाहता हूँ।" राजूदत ने कहा- "स्वागत है अतिथि आपका, मुझे ही चाणक्य कहते हैं।''

🔴 राजदूत के नेत्र आश्वर्य से खुले ही रह गए। इस व्यक्ति से तो अभी भेंट हो ही चुकी थी। लंबी-सी चोटी साधारण-सी धोती पहने सीधा मेरुदंड किये पुस्तक के पृष्ठ पलटने वाला यह किसी देश का प्रधान मंत्री हो सकता है?  आश्चर्य! स्वावलंबन का यह अनोखा जीवन कि पानी तक स्वयं भरकर लाता है। यहां तो कोई नौकर चाकर भी दिखाई नहीं देते। फर्नीचर अलमारियाँ तथा उपयोग एवं दिखावे की अन्य वस्तुओं का एकदम अभाव।

🔵 वह कुटिया में एक आसन पर बैठकर चाणक्य से चर्चा करता रहा। जब वह अपने देश को लौटा तो उसने वहाँ के लोगों को बताया कि भारत एक महान् देश है और उसे महान बनाने का श्रेय वहाँ के महापुरुषों को है, जो त्याग और संयम का जीवन व्यतीत करते हैं। जो सादा जीवन को ही अपना गौरव मानते हैं। वहाँ के प्रधानमंत्री तक निर्धन व्यक्ति जैसा जीवन व्यतीत करते हैं। जिस देश का प्रधानमंत्री अपने देशवासियों की इतनी चिंता करता है और धन के सदुपयोग पर ध्यान रखता है, फिर उसे कौन विदेशी परास्त करने की हिम्मत कर सकता है ?

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 संस्मरण जो भुलाए न जा सकेंगे पृष्ठ 60, 61

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