शनिवार, 4 मार्च 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 5 March

🔴 एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं। जब तक हृदय मन्दिर में बुरी वासनाओं, पाप और कल्मषों की पूजा हो रही है तब तक धर्म और ईश्वर भक्ति को वहाँ स्थान नहीं मिल सकता है। जब हृदयासन पर परमात्मा को बिठाया जाता है तो दुष्वृत्तियां नहीं ठहर सकतीं।

🔵 किसी की निन्दा मत करो। याद रखो इससे तुम्हारी जबान गंदी होगी, तुम्हारी वासना मलिन होगी। जिसकी निंदा करते हो उससे वैर होने की संभावना रहेगी और चित्त में कुसंस्कारों के चित्र अंकित होंगे।

🔴 ईश्वर नहीं चाहता कि आदमी शैतानी ताकत के बल पर असुरों जैसा अभिमानी बने। उस महाशक्ति की इच्छा है दुनिया में सत्य, प्रेम और पवित्रता का साम्राज्य रहे। बीसवीं शताब्दी का वैज्ञानिक मनुष्य आसुरी संपदा के अभिमान में डूब गया है फलतः उसके कदम नाश की ओर उठते हुए चले जा रहे हैं।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

👉 मौनं सर्वार्थ साधनम (भाग 1)

🔵 मौन साधना की अध्यात्म-दर्शन में बड़ी महत्ता बतायी गयी है। कहा गया है “मौनं सर्वार्थ साधनम्।” मौन रहने से सभी कार्य पूर्ण होते हैं। मह...