शनिवार, 25 फ़रवरी 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 26 Feb 2017

🔴 बुरे विचार और बुरे कार्य भी नींद के शत्रु माने गये हैं। ऊपर कहा जा चुका है—सदाचारी को, सन्तोषी को, स्वस्थ नींद आए बिना नहीं रह सकती। गन्दे विचार, उन्हें पैदा करने वाला गन्दा साहित्य, उपन्यास अश्लील वार्तालाप, अभद्र व्यवहार गन्दे चित्रों से मनुष्य को बचना चाहिए। चरित्र का संयमी सदाचारी होना भी आवश्यक है। आधुनिक युग में हम लोगों का चारित्रिक पतन और दुराचार पूर्ण, गन्दा जीवन, गन्दे विचार अश्लील कल्पनाएँ एवं द्वेष, आवेश, संशय, भय अविश्वास आदि अनिद्रा की बीमारी के मुख्य कारण हैं।

🔵 सुन्दर बनने के लिए बाहरी साधन जरूरी नहीं है। इस भ्रान्त धारणा को-कि अधिक बनाव शृंगार करेंगे तो अधिक लोग आकर्षित होंगे—अपने मस्तिष्क से निकाल कर अपने अंतःकरण के सौंदर्य को खोजने का प्रयत्न कीजिए। आपकी प्रसन्नता में, आपके सुखद विचारों में सुन्दरता भरी हुई है उसे जागृत कीजिए। सच्चा सौंदर्य मनुष्य के सद्गुणों में है। हम गुणवान् बनें, तेजस्वी बनें तो सौंदर्य हमारा साथ कभी न छोड़ेगा।

🔴 आज सम्पूर्ण नारी जाति का कर्त्तव्य है कि निन्दनीय वातावरण छोड़कर आगे बढ़े, और समाज सुधार, नैतिक उत्थान तथा धार्मिक पुनर्जागरण का संदेश मानवता को दें। उन्हें इस ढंग से कार्य करना होगा कि पुरुषों को बल मिले, उनकी खोई हुई शक्तियाँ जागें। इसके लिए उन्हें पुरुषों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर आगे बढ़ना होगा। अपने कार्यक्षेत्र का सफलतापूर्वक निर्वाह किये बिना विकास की गति को स्त्रियाँ प्रवाहमान नहीं रख सकतीं। उन्हें सारे उत्तरदायित्व समझदारी से निभाने पड़ेंगे।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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