शनिवार, 18 फ़रवरी 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 19 Feb 2017

🔴 मानसिक स्थिति पर ही जीवन की सफलता -असफलता निर्भर करती है। जिस तरह कुशल ड्राइवर गाड़ी को सही सलामत मंजिल तक पहुँचा देता है, उसी तरह स्वस्थ मनः स्थिति मनुष्य के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता का कारण बन जाती है। लेकिन जिस तरह अनाड़ी ड्राइवर गाड़ी को कहीं भी दुर्घटनाग्रस्त कर सकता है उसी तरह असन्तुलित और अस्वस्थ मन जीवन नैया को मझधार में ही डुबो देता है, नष्ट कर देता है।

🔵 जीवन का एक निर्दिष्ट लक्ष्य, कार्यक्रम बनाया जाय। उसी के अनुरूप सद्विचारों और उदात्त भावनाओं के चिंतन में मन को एकाग्र कर दिया जाय। मन चाहे या न चाहे, वह कितना ही भागे, उसे उस लक्ष्य और कार्यक्रम पर ही पकड़कर बार-बार लगाइये। इसके सिवा जो भी विरोधी विचार, भावनायें मन में उठे, उनकी ओर ध्यान न दें, उनसे विरक्त रहें। थोड़े समय में मन की चंचल दूर होकर मन एकाग्र हो जायगा। आप ऐसे एकाग्र मन की शक्ति का जिस दिशा में भी उपयोग करेंगे, उधर ही यह आश्चर्य उत्पन्न कर दिखायेगा।

🔴 अपने दैनिक जीवन-क्रम में भी जहाँ तक बने स्थिरता, धैर्य और शान्ति के साथ काम करना चाहिए। चंचलता भागदौड़, अस्तव्यस्तता, आवेश और उद्वेग को तो जीवन में किसी भी शर्त पर स्थान नहीं होना चाहिये। इससे मन की शक्ति नष्ट होती है। हम जो भी कुछ करें, वह व्यवस्थित शान्त होकर करें।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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