रविवार, 8 जनवरी 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 9 Jan 2017

🔴 मनुष्य का वास्तविक हित इस बात में नहीं कि उसे धन, मान, स्त्री, पुत्र आदि के सुख-साधन मिल जाय, वरन् इसमें है कि उसकी अंतरात्मा सद्गुणों की विभूतियों से संपन्न होककर अपना ही नहीं असंख्यों का कल्याण करता हुआ पूर्णता के परम लक्ष्य को प्राप्त करने में समर्थ हो। हम अपने स्वजनों के सच्चे हितैषी और सच्चे हितवादी बन कर रहेंगे। उन्हें वासना और तृष्णा की कीचड़ में बिलखते हुए और पेट-प्रजनन के जाल-जंजाल में फड़फड़ाता हुआ न छोड़ेंगे।

🔵 शिक्षा, उपदेश, मार्गदर्शन करने के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं। सद्गुरु कितने ही रूप में हमारे काय-कलेवर में विराजमान है और अपना प्रशिक्षण निरन्तर जारी रख रहे हैं। उचित और अनुचित का भेद करने वाला परामर्श अपना परमात्मा निरन्तर देता रहता है। सत्कर्म करते हुए आत्म-संतोष, दुष्कर्म करते हुए आत्म-धिक्कार की जो भावना उठती रहती है उसे ईश्वरीय प्रशिक्षण अंतरात्मा का उपदेश कहा जा सकता है।

🔴 ‘‘मैं यह काम करूँगा और करके ही रहूँगा चाहे जो कुछ हो’’-ऐसी बलवती इच्छा को जिसकी ज्योति अहर्निश कभी मंद न हो दृढ़ इच्छा शक्ति कहते हैं। बहुत से लोग ठीक से निश्चय नहीं कर पाते कि वे क्या करें। उनका मन हजार दिशाओं में दौड़ता है। वे दृढ़ इच्छा शक्ति के चमत्कार को क्या समझ सकते हैं? इस शक्ति के अंतर्गत दृढ़ निश्चय, आत्म विश्वास, कार्य करने की अनवरत चेष्टा और अध्यवसाय आदि गुण आ जाते हैं।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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