सोमवार, 23 जनवरी 2017

👉 सोशल मीडिया पर उल्लू बनने से ऐसे बचें (भाग 2)


🔴 मनी ट्रैप

आपको वक्त-बेवक्त मेसेज आता है 'सस्ती दर पर लोन चाहिए'... 'क्या आप घर खरीदना चाहते हैं?'... 'क्या आपको इन्वेस्ट करना है?' आदि आदि। 'ट्राई करने में क्या जाता है, कौन-सा अपना पैसा जा रहा है' यह सोचकर लोग ऐसे मेसेज आगे बढ़ा देते हैं। आजकल हर किसी को वट्सऐप पर एक जैसे मेसेज कोई-न-कोई रिश्तेदार या दोस्त भेजता रहता है। सस्ता पाने के लालच में हम ऐसे मेसेज को बढ़ावा देते हैं। ऐसे ही कुछ मेसेज हैं:
- Amazon पर सिर्फ 1 रुपये में पेन ड्राइव
- Flipkart पर सिर्फ 1 रुपये में मोबाइल
- LED बल्ब फ्री में

- या कुछ भी जिसकी ज्यादा बातें हो रही हैं या टीवी/पेपर पर विज्ञापन आ रहे हैं।
दरअसल, ठग सिर्फ 150-200 रुपये में पॉप्युलर साइट के नाम से एक वेबसाइट का नाम (कुछ बदलाव के साथ) बुक करा लेते हैं। यह पेज बिलकुल Flipkart, Amazon या दूसरी पॉप्युलर वेबसाइट जैसा दिखता है। इस पर आपको जो बताया गया होता है, उसका फोटो होता है। फिर आपकी डिटेल्स मांगी जाती हैं। आप डिटेल्स शेयर करते हैं तो वह सारी जानकारी उनके डेटाबेस में जाती है। बस हो गया उनका काम! अब मुफ्त या बेहद सस्ता लेने के चक्कर में लग गया न आपको चूना और हो गई ठगों की चांदी। दरअसल, हर वॉट्सऐप ग्रुप में कम-से-कम 25 लोग होते हैं। आपने अगर 8 ग्रुप में मेसेज शेयर किया तो 200 लोगों के मन में लालच पैदा हुआ। 25 लोगों में से कम-से-कम 5 तो करेंगे, फिर वे और उनके 8 ग्रुप में तो सोचिए सिर्फ एक दिन में यह मेसेज लाखों लोगों तक पहुंच जाएगा। किसी बड़ी कंपनी को टेली-मार्केटिंग करनी होती है तो वह किसी बड़ी मोबाइल कंपनी से लाखों रुपये देकर हमारे नंबरों का डेटाबेस खरीदते हैं, पर यहां तो सिर्फ 150 रु लगाकर ये लोग बहुत कम में (करीब 2-4 लाख) में छोटी कंपनियों को बेच देते हैं। तो यह तो लॉटरी हो गई! 150-200 रुपये का टिकट और लाखों की कमाई, वह भी सिर्फ चंद दिनों में और बिना कोई मेहनत। फंस जाते हैं आप। इसके बाद कुछ-न-कुछ बेचने के लिए भर-भर के SMS और फोन कॉल आने लगते हैं। इसका असली फायदा किसी और को होता है और आप ठगे जाते हैं।

 
🔴 कैसे बचें


- वेबसाइट का नाम और उसकी स्पेलिंग ध्यान से देखें।
- यह भी गौर करें कि क्या उस मेसेज को 5-10 वट्सऐप ग्रुप्स में शेयर करने को कहा गया है?
दरअसल, हम सोचते हैं कि ऐमजॉन या फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी कंपनी की तरफ से आया है तो घपला नहीं होगा। वेबसाइट के नाम और पेज पर कंपनी का नाम भी दिख रहा होता है। लेकिन नकली वेबसाइट का नाम लंबा और चिन्हों से बना होता है, कोई भी सिंपल और ऑरिजिनल (www.Amazon.com, www.flipkart.com आदि) नहीं होता। ऐसे मेसेज में आपका नाम, मोबाइल नंबर और अड्रेस की मांग की जाती है।
- ऐसे किसी भी मेसेज को आगे शेयर न करें, जहां जरूरत से ज्यादा सस्ता सामान मिलने का दावा किया जा रहा है।
- अगर किसी अनजान नंबर से ऐसा मेसेज आया हो तो उस नंबर को ब्लॉक कर दें।
- अगर आपका कोई जानकार ऐसे मेसेज शेयर करे तो उसे भी इससे परहेज करने को कहें।
- ऐसे किसी भी मेसेज में दिए URL पर क्लिक करने से बचें और मेसेज को दूसरों के साथ शेयर भी न करें।

- दूसरों को भी ऐसा करने से रोकें और बताएं कि यह फेक मेसेज है।

🔴 पॉलिटिकल ट्रैप

राजनीतिक मकसद के लिए सबसे ज्यादा झूठ बोला जाता है और सोशल मीडिया का भी इसमें जमकर इस्तेमाल हो रहा है। सोशल मीडिया के जरिए राजनीतिक झूठ फैलाने के कई फायदे और मकसद हैं जैसे कि पार्टी या नेता के लिए लोगों के दिल में इज्जत बढ़ाना, किसी दूसरे के खिलाफ नफरत बढ़ाना, किसी पार्टी के अजेंडे को आगे बढ़ाना आदि।
- कोई पॉलिसी या जनता के लिए कोई काम कभी किसी पूर्व मंत्री ने किया हो, उसे भी नया बता कर फैलाया जाता है। या तो उस पॉलिसी के बारे में लोगों को पता ही नहीं होता या फिर लोग उसके बारे में भूल जाते हैं और उस खबर को सही समझने लगते हैं।
- फोन नंबर 104 से आप जरूरत होने पर अपने घर या कहीं भी ब्लड बैंक से खून मंगा सकते हैं। यह नंबर चालू तो बरसों पहले हुआ था, लेकिन अब इसे प्रधानमंत्री मोदी की सौगात के रूप में फैलाया जा रहा है।
- फोन नंबर 1098 को यह कहकर पेश किया जा रहा है कि इस पर फोन करने पर लोग आपका बचा हुआ खाना उठाने आएंगे ताकि जरूरतमंदों के बीच बांटा जा सके। हकीकत यह है कि यह नंबर बरसों पहले एक एनजीओ ने चालू किया था। यह एनजीओ बच्चों की देखरेख करता है। यह नंबर इसलिए शेयर किया गया था कि कहीं कोई गुम हुआ बच्चा मिले तो एनजीओ को फोन करें। लेकिन अब बचे खाने के नाम पर इस नंबर पर इतने फोन आने लगे हैं कि एनजीओ को अपना असली काम करने में दिक्कतें आने लगी हैं।
- फोटो में कंप्यूटर से एडिटिंग करके चेहरा या कुछ और बदल देते हैं, जिससे उसका मतलब बदल जाता है। एक फोटो में प्रधानमंत्री मोदी को सोनिया गांधी और एक शेख के पैर छूते दिखाया गया था जबकि असल फोटो में वह अडवाणी जी के पैर छू रहे थे।
- एक और फोटो में महात्मा गांधी को बाबा साहेब आंबेडकर के पैर छूते दिखाया था जबकि वे दो अलग-अलग फोटो थे। एक आंबेडकर का फैमिली फोटो था, दूसरे में गांधी जी दांडी मार्च में जमीन पर से नमक उठा रहे थे। दोनों को मिक्स करके नया फोटो तैयार किया गया था।
- ट्विटर पर बहुत-से सिलेब्रिटी/नेता हैं जो अपनी मर्जी से कुछ भी लिखते हैं। लोग चाव से उन्हें पढ़ते हैं और जवाब देते हैं। अब यहां दो बातें होती हैं:
1. किसी सिलेब्रिटी या नेता का ट्वीट लेकर कंप्यूटर से उसे बदल कर झूठ फैलाने वाले लोग अपनी मर्जी से कुछ भी लिख देते हैं। यह देखने में असली लगता है, पर होता नहीं है।
2. लोग किसी एक शख्सियत के नाम से छोटे-मोटे बदलाव (कोई निशान या स्पेलिंग बदलकर) के साथ दूसरे हैंडल बना लेते हैं। फिर इनके स्क्रीनशॉट लेकर वट्सऐप या फेसबुक पर हजारों की संख्या में कुछ भी शेयर करते हैं जिससे लोगों पर प्रभाव पड़ता है।
- झूठ के बल पर दंगे भड़काने की कोशिश भी की जाती है। कुछ महीने पहले कश्मीर में काफी तनाव था। लोग परेशान थे पर सोशल मीडिया पर लोग दंगे भड़काने के लिए बरसों पुराने या दूसरे देशों के फोटो नई कह कर शेयर कर रहे थे। इन फोटो के जरिए आपकी देशभक्ति की भावनाओं का फायदा उठाने की कोशिश की जा रही थी। सब फोटो पर एक लाइन होती थी : 'बिका हुआ मीडिया आपको यह सचाई नहीं दिखाएगा। अगर आप सच्चे भारतीय हो तो हर ग्रुप में जरूर फॉरवर्ड करो।' ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है।

 
🔴 कैसे बचें

 
- किसी भी फोटो या मेसेज पर आंख मूंदकर भरोसे करने से बचें। अगर आप गौर से देखेंगे और सोचेंगे तो कई तरह के झूठ खुद ही पकड़ लेंगे।
- किसी भी नंबर को आगे फॉरवर्ड करने से पहले एक बार खुद मिलाकर जांच लें।
- किसी के नाम से फैल रहे मेसेज की सचाई खुद भी इंटरनेट पर जाकर जरूर चेक कर लें।
- ट्विट को चेक करने के लिए सामने वाले का अकाउंट वेरिफाइड या है नहीं, यह जरूर चेक करें। वेरिफाइड अकाउंट के सामने एक नीले गोले में सफेद टिकमार्क होता है जिससे पता चलता है कि वह असली है। जिनके हैंडल पर ऐसा नहीं होता तो देखें कि उनके कितने फॉलोअर्स हैं और वह कैसा ट्वीट करते हैं? जैसे कि किसी हीरो के नाम (थोड़ी स्पेलिंग बदल कर) का हैंडल होगा, पर उसके सिर्फ 1000-2000 ही फॉलोअर्स होंगे और करीबन सारे ट्वीट राजनीति से भरे होंगे। साथ ही, फिल्म/अवॉर्ड फंक्शन आदि के बारे में कुछ खास नहीं होगा। ऐसे में मान लें कि वह फेक हैंडल है।


🌹 अगले अंक में समाप्त  

 
👉 सोशल मीडिया पर उल्लू बनने से ऐसे बचें (भाग 1) 

http://awgpskj.blogspot.in/2017/01/1_22.html

👉 जो सर्वश्रेष्ठ हो वही अपने ईश्वर को समर्पित हो

🔶 एक नगर मे एक महात्मा जी रहते थे और नदी के बीच मे भगवान का मन्दिर था और वहाँ रोज कई व्यक्ति दर्शन को आते थे और ईश्वर को चढाने को कुछ न...