रविवार, 22 जनवरी 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 23 Jan 2017

🔴 मुद्दतों को देव परम्पराएँ अवरुद्ध हुई पड़ी हैं। अब हमें अपना सारा साहस समेटकर तृष्णा और वासना के कीचड़ से बाहर निकलना होगा और वाचालता एवं विडम्बना से नहीं, अपनी कृतियों से अपनी उत्कृष्टता का प्रमाण देना होगा। हमारा उदाहरण ही दूसरे अनेक लोगों को अनुकरण का साहस प्रदान करेगा। वाणी और लेखनी के माध्यम से लोगों को किसी बात की-अध्यात्मवाद की भी जानकारी कराई जा सकती है इससे अधिक भाषणों का कोई उपयोग नहीं। दूसरों को यदि कुछ सिखाना हो तो उसका एकमात्र तरीका अपना उदाहरण प्रस्तुत करना है।

🔵 नर पशुओं और नर पिशाचों का बाहुल्य जब कभी भी संसार में होगा तो विपत्तियाँ आयेंगी और अगणित प्रकार की विभीषिकाएँ उत्पन्न होगी। यह अभिवृद्धि जब चिन्ताजनक स्तर तक पहुँच जाती है तो ईश्वर की इस परम प्रिय सृष्टि के लिए सर्वनाश का खतरा उत्पन्न हो जाता है। इसी को बचाने के लिए उन्हें हस्तक्षेप करना पड़ता है, अवतार लेना पड़ता है।

🔴 अगले दिनों देवासुर संग्राम होने वाला है उसमें मनुष्य और मनुष्य आपस में नहीं लड़ेंगे, वरन् आसुरी और दैवी प्रवृत्तियों में जमकर अपने -अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष होगा। असुरता अपने पैर जमाये रहने के लिए देवत्व अपनी स्वर्ग संभावनाएँ चरितार्थ करने के लिए भरसक चेष्टा करेंगे। इस विचार संघर्ष में देवत्व के विजयी हो जाने पर वे परिस्थितियाँ उत्पन्न होंगी जिनमें हर व्यक्ति को उचित न्याय, स्वातन्त्र्य, उल्लास, साधन और संतोष मिल सके।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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