शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 21 Jan 2017

🔴 जमाना खराब है, लोग बुरे हैं, कोई हमारी सुनता नहीं आदि शब्दों के पीछे कार्यकर्त्ता की निराशा, उदासीनता और लगन की कमी की ही झाँकी मिलती है। लगनशील व्यक्ति हर स्थिति में हर काम कर सकता है। बातों का युग अब बहुत पीछे रह गया। अब कार्य से किसी व्यक्ति के झूठे या सच्चे होने की परख की जाएगी।

🔵 सद्विचार निर्माण के लिए यदि संसार का सारा धन खर्च हो जाये या सारा समय लग जाये तो भी उसे कुछ घाटे की बात नहीं माननी चाहिए। वर्तमान विचार क्रान्ति महाकाल का तीसरा नेत्र ही है। जो प्रचण्ड दावानल का रूप धारण कर अज्ञान युग की सारी विडम्बनाओं को भस्मसात कर स्वस्थ और स्वच्छ दृष्टिकोण प्रदान करेगी। इन उपलब्धियों के बाद विश्व शान्ति के मार्ग में कोई कठिनाई शेष न रह जायेगी।

🔴 अपने परिवार में एक से एक बढ़कर उत्कृष्ट स्तर की आत्माएँ इन दिनों मौजूद हैं। वे जन्मी भी इसी प्रयोजन के लिए हैं। ऐसे महान् अवसरों पर उत्कृष्टता संपन्न सुसंस्कारी आत्माएँ ही बड़ी भूमिकाएँ प्रस्तुत करने का साहस करती हैँ। हममें से अनेकों परिजन अभी अपनी ऐतिहासिक भूमिका प्रस्तुत करने की बात सोच रहे हैं। कई उसके लिए कदम बढ़ा रहे हैं, कई दुस्साहसपूर्वक अग्रगामी होने की स्थिति को छू रहे हैं यह शुभ लक्षण है।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 लक्ष्मीजी का निवास

🔶 एक बूढे सेठ थे। वे खानदानी रईस थे, धन-ऐश्वर्य प्रचुर मात्रा में था परंतु लक्ष्मीजी का तो है चंचल स्वभाव। आज यहाँ तो कल वहाँ!! 🔷 सेठ ...