शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 14 Jan 2017

🔴 हमारी चिट्ठी, वाणी, प्रेरणा, भावना और आकाँक्षा का मूर्त रूप अखण्ड ज्योति ही है। इसे भावना और ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए और इन पन्नों के साथ लिपटी हुई प्रेरणाओं को मनन  और चिन्तन पूर्वक हृदयंगम करना चाहिए। हमारी आत्मा से अपनी आत्मा को जोड़ने और भावना के साथ भावना का स्पर्श करने का यही तरीका है।

🔵 अखण्ड ज्योति का प्रत्येक सदस्य अब एक धार्मिक पत्रिका का पाठक मात्र न रहेगा, वरन् वह एक लोकशिक्षक के रूप में अपना उत्तरदायित्व अनुभव करें। युग निर्माण के लिए आवश्यक प्रकाश अखण्ड ज्योति प्रस्तुत करेगी, वह एक बिजलीघर के रूप में रहेगी और हममें से प्रत्येक एक बल्ब के रूप में प्रकाशित होकर अपने क्षेत्र में प्रकाश फैलाएँ। अज्ञान ही मानव जाति का सबसे बड़ा शत्रु है, इसी अंधकार में नाना प्रकार के पाप पनपते हैं।

🔴 स्वच्छ मन का आंदोलन व्यक्ति की आंतरिक दुर्बलता के विरुद्ध एक महान् अभियान है। कुविचारों की हानियाँ, स्वार्थपरता के दुष्परिणाम अभी लोगों की आँखों में नहीं है। आज हर आदमी यही सोचता है कि अनैतिक रहने में ही उसका भौतिक लाभ है। इसलिए वह बाहर से नैतिकता का समर्थन करते हुए भी भीतर ही भीतर अनैतिक रहता है। हमें मानसिक स्वच्छता का वह पहलू जनता के सामने प्रस्तुत करना होगा, जिसके अनुसार यह भली प्रकार समझा जा सके कि अनैतिकता व्यक्तिगत स्वार्थपरता की दृष्टि से भी घातक है, इसमें हानि ही हानि है।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 होशियारी और समझदारी

🔶 होशियारी अच्छी है पर समझदारी उससे भी ज्यादा अच्छी है क्योंकि समझदारी उचित अनुचित का ध्यान रखती है! 🔷 एक नगर के बाहर एक गृहस्थ महात्म...