गुरुवार, 12 जनवरी 2017

👉 आत्मचिंतन के क्षण 12 Jan 2017

🔴 घृणा पापी से नहीं, पाप से करो। यथार्थ में पापी कोई मनुष्य नहीं होता, वरन् पाप मनुष्य की एक अवस्था है। इसलिए यदि संशोधन करना हो तो पाप का ही करना चाहिए। अपराधी को यदि दण्ड देना हो तो उसे सुधारने के लिए ही दिया जाना चाहिए। मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज की प्रत्येक अवस्था का उस पर प्रभाव पड़ सकता है इसलिए किसी को घृणापूर्वक बहिष्कृत कर देने से समस्या का समाधान नहीं होता, वरन् बुराई का शोधन करके अच्छे व्यक्तियों का निर्माण करने से ही उस अवस्था का नाश किया जा सकता है, जो घृणित है, हेय और जिससे सामाजिक जीवन में विष पैदा होता है।

🔵 शरीर रक्षा, आजीविका उपार्जन, मनोरंजन एवं आपत्तियों का निर्धारण करने के लिए जिस प्रकार दैनिक जीवन में हम प्रयत्न करते हैं, समय लगाते हैं उसी प्रकार युग निर्माण कार्यक्रमों को भी जीवन की सार्थकता का एक अत्यन्त उत्तरदायित्व समझें और उसके लिए नियमित रूप से कुछ समय निकालें तो कोई कारण नहीं कि आज सपने जैसी दीखने वाली युग निर्माण योजना कल साकार रूप धारण न कर ले। हममें से प्रत्येक को इसके लिए समयदान देना चाहिए। हमारी उदारता और महानता अब इसी कसौटी पर कसी जाएगी।

🔴 युग निर्माण योजना कागजी या कल्पनात्मक जल्पना नहीं है। यह समय की पुकार, जनमानस की गुहार और दैवी इच्छा की प्रत्यक्ष प्रक्रिया है। इसे साकार होना ही है। इसको आरंभ करने का श्रेय अखण्ड ज्योति परिवार को मिल रहा है, इस सौभाग्य के लिए हममें से प्रत्येक को प्रसन्न होना चाहिए और गर्व अनुभव करना चाहिए। योजना के क्रियान्वयन के लिए बिना समय नष्ट किये हमें अपने कर्त्तव्य और उत्तरदायित्व की पूर्ति के लिए कटिबद्ध हो जाना चाहिए। आलस्य और उपेक्षा करने वालों को पश्चाताप ही हाथ रह जाएगी।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 बूढ़ा पिता

🔷 किसी गाँव में एक बूढ़ा व्यक्ति अपने बेटे और बहु के साथ रहता था। परिवार सुखी संपन्न था किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी । बूढ़ा बाप ज...