गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण 30 Dec 2016

 🔴 युग निर्माण परिवार के तथाकथित अछूतों को यह कहा गया है कि अपने वर्ग में जितनी अच्छी तरह, जितनी अधिक मात्रा में काम कर सकते हैं, उतना दूसरे लोग नहीं कर सकते। उनमें से जिनमें जीवन हो, प्रकाश हो, उत्पीड़न के प्रति दर्द, विद्रोह तो वे भी निरी सुख-सुविधाओं की योजनान बनाएँ, वरन् पिछड़े वर्ग में प्रगतिशीलता उत्पन्न करने के लिए अपनी समस्त योग्यताओं को, साधनों को समर्पित कर दें।

🔵 पुरुष का विशेष उत्तरदायित्व है कि वे नारी उत्कर्ष में अतिरिक्त योगदान देकर पिछले दिनों किये गये अन्याय का प्रायश्चित करें, इसी प्रकार सवर्ण लोगों का कर्त्तव्य है कि तथाकथित अछूतों को पिछले दिनों लांछित किया गया है उतनी ही अधिक सुविधाएँ उन्हें ऊँचा उठाने तथा आगे बढ़ाने के लिए प्रदान करें। नीचे वाले ऊपर उठने के लिए अपनी सारी शक्ति लगा दें और ऊपर वाले पूरा सहारा देकर उन्हें ऊपर उठायें तथी वर्तमान विषमता का अंत हो सकेगा।

🔴 नारी समाज के उत्कर्ष में नारी को ही आगे आना पड़ेगा। भारतीय समाज की दशा विचित्र है। उसमें नर और नारी का सम्मिश्रण विचित्र शंका-कुशंकाओं, अविश्वासों और कुकल्पनाओं से घिरा रहता है। इसलिए नारी वर्ग के उत्कर्ष की अगणित योजनाओं को कार्यान्वित कर सकना नर को उतना सुगम नहीं, जितना नारी के लिए।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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