मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण 21 Dec 2016

 🔴  दूसरों को न तो खींच सकता है और न दबा सकता है। बाहरी दबाव क्षणिक होता है। बदलतो तो मनुष्य अपने आप है, अन्यथा रोज उपदेश-प्रवचन सुनकर भी इस कान से उस कान निकाल दिये जाते हैं। दबाव पड़ने पर बाहर से कुछ दिखा दिया जाता है, भीतर कुछ बना रहता है। इन विडम्बनाओं से क्या बनना है। बनेगा तो अंतःकरण के बदलने से और इसके लिए आत्म-प्रेरणा की आवश्यकता है। क्रान्ति अपने से ही आरंभ होगी।

🔵 हम आत्म-निर्माण में प्रवृत्त होकर ही समाज निर्माण का लक्ष्य पूरा कर सकेंगे। युग निर्माण परिवार के प्रत्येक सदस्य को अपनी स्थिति अनुभव करना चाहिए। उसे विश्वास करना चाहिए कि उसने दैवी प्रयोजन के लिए यह जन्म लिया है। इस युगसंधि वेला में उस विशेष उद्देश्य के लिए भेजा गया है। उसे शिश्नोदर परायण नर-कीटकों की पंक्ति में अपने को नहीं बिठाना है। उसे लोभ-मोह के लिए नहीं सड़ना-मरना है।

🔴 यह समय ऐसा है जैसा किसी-किसी सौभाग्यशाली के ही जीवन में आता है। कितने व्यक्ति किन्हीं महत्त्वपूर्ण अवसरों की तलाश में रहते हैं। उन्हें उच्च-स्तरीय प्रयोजनों में असाधारण भूमिका संपादित करने का सौभाग्य मिले और वे अपना जीवन धन्य बनावें। यह अवसर युग निर्माण परिवार के सदस्यों के सामने मौजूद है। उन्हें इसका समुचित सदुपयोग करना चाहिए। इस समय की उपेक्षा उन्हें चिरकाल तक पश्चाताप की आग में जलाती रहेगी।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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