मंगलवार, 22 नवंबर 2016

👉 बलिदानी मिट्टी-अमूल्य

🔴 एक बार विदर्भ देश में जोर का अकाल पड़ा। एक गाँव में किसी के पास कुछ भी न बचा। उसी गाँव के एक किसान के पास एक कोठी भरा धान था। वह उससे कई महीने तक अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकता था, लेकिन उसे ध्यान आया कि अगले वर्ष मौसम के समय खेतों में बोने के लिए बीज न मिलेगा तो फिर से सबको अकाल का सामना करना पड़ेगा।

🔵 किसान ने उस धान के कोष को खाने में खर्च नहीं किया और सपरिवार सहर्ष मृत्यु की गोद में सो गया। लोगों ने सोचा कि काफी अन्न होते हुए भी किसान परिवार क्यों मर गया। लेकिन उसकी वसीयत को पढ़कर सभी किसान की महानता पर हर्ष सें आँसू बहाने लगे।

🔴 उसमें लिखा था,"मेरा समस्त अन्न खेतों में फसल बोने के समय गाँव में बीज के लिए बाँट दिया जाय। " वर्षा हुई और चारों ओर नई लहलहाती फसल से लग रहा था मानो किसान मरा नहीं अपितु असंख्यों जीवधारी के रूप में हरे- भरे खेतों में लहलहाता फिर से धरती पर उतर आया हो।

🔵 वहाँ के राजा ने अपने सेवकों को बुलाकर धरती से एक-एक उपहार लाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा-"जिसका उपहार सर्वश्रेष्ठ होगा, उसी को गाँव का  प्रधान सेवक के पद पर नियुक्त किया जायेगा।

🔴 आज्ञा मिलने की देर थी। सभी सेवक अच्छे उपहारों की तलाश में पृथ्वी की ओर दौड़ने लगे। सब इस प्रयत्न में थे कि ऐसा उपहार ले जाया जाय जिससे मेरी पदोन्नति शीघ्र हो जाये। एक-से-एक बहुमूल्य उपहार सेवकों ने लाकर सामने रखे, पर विधाता के चेहरे पर कहीं प्रसन्नता और सन्तोष की रेखा तक न थी। हिसाब लगाया गया, तो एक सेवक आना शेष था। उसकी प्रतीक्षा बड़ी आतुरता से की जा रही थी।

🔵 आखिर प्रतीक्षा की घड़ियाँ पूरी हुई और वह सेवक भी आ गया। कागज की एक पुड़िया राजा को देकर नीचे डरते-डरते बैठ गया। वह सोच रहा था कि कहीं ऐसा न हो कि देर से आने के कारण डाँट पड़े। उस सेवक की पुड़िया देखकर अन्य कितने ही सेवक मन में हँसने लगे, कई उसकी मूर्खता पर प्रसन्न हो रहे थे।

🔴 राजा ने पुड़िया खोली-'अरे यह क्या, इस पुड़िया में मिट्टी बाँध लाये?' सेवक ने हाथ जोड़कर कहा-'हाँ भगवन्! मैंने पृथ्वी का चप्पा-चप्पा छान मारा। शायद ही कोई स्थान रह गया हो, जहाँ मैं नहीं गया। मैंने इस बात की बड़ी कोशिश की कि ऐसा उपहार ले चलूँ जो आपको पसन्द आ जाये, पर कुछ समझ ही नहीं पड़ा। प्रभु! है तो यह मिट्टी ही, पर किसी साधारण स्थान की नहीं है। यह वह मिट्टी है जहाँ के लोगों ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए खुशी-खुशी अपने प्राण न्यौछावर कर दिये। '

🔵 राजा ने वह मिट्टी बड़ी श्रद्धा से अपने मस्तक पर लगायी और कहा-"सेवको! जब तक पृथ्वी पर ऐसे सन्त और सज्जन पुरुष बने रहेंगे तब तक धरती पर सुख-शान्ति क्री-सम्भावनाएँ भी कम न होंगी।"

👉 हीरों से भरा खेत

🔶 हफीज अफ्रीका का एक किसान था। वह अपनी जिंदगी से खुश और संतुष्ट था। हफीज खुश इसलिए था कि वह संतुष्ट था। वह संतुष्ट इसलिए था क्योंकि वह ...