मंगलवार, 8 नवंबर 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण Aatmchintan Ke Kshan 8 Nov 2016

🔴 मनोजगत् के प्रति दुर्व्यवहार की एक विडम्बना द्वेष, दुर्भाव और दुश्चिन्ताओं के रूप में देखी जा सकती है। जो प्रगति कर रहा है, उन्नति के पथ पर आगे बढ़ रहा है, उससे डाह रखकर हम उसकी प्रगति तो नहीं रोक सकते, हाँ अपने ही विकास में रोड़े जरूर खड़े कर सकते हैं। यह शत्रुता फिर किसके साथ बरती कही जाएगी, प्रगति करने वाले के साथ या अपने आपके साथ? इसी प्रकार की निर्मूल चिन्ताएँ, अकरणीय आशंकाएँ और आंतरिक द्वन्द्वों के बीच अपनी योग्यता, प्रतिभा, शक्ति को पीसते रहकर आत्म हिंसा का मार्ग ही तय किया जा सकता है।

🔵 जीवन निर्माण के लिए आत्म-निष्ठा पर आधारित आत्म-विश्वास की अभिवृद्धि आवश्यक है। इसका सहज मार्ग अपने कर्त्तव्य एवं उत्तरदायित्वों को ईमानदारी के साथ पूर्ण करते चलने में है। कार्यों के छोटे-बड़े की चिन्ता नहीं होनी चाहिए। छोटे-छोटे कार्यों के सम्पादन करते चलने से मनोबल बढ़ता है और आगे का मार्ग प्रशस्त होता है। बड़े लोगों ने अपने जीवन काल के प्रारंभ में छोटे काम ही हाथ में लिए थे। कोई भी कार्य छोटा और बड़ा नहीं होता, यह तो कार्य सम्पादन करने वालों की मनोभूमि पर आधारित होते हैं।

🔴 जीवन के हर क्षेत्र में विश्वास की आवश्यकता है। विश्वास हमारा मार्गदर्शन करता है तथा सद्पथ पर चलने की प्रेरणा देता है। जीवन रहस्य को समझने के लिए आत्म-विश्वास का सहारा लेना ही पड़ेगा। जीवन निर्माण में आत्म-विश्वास का प्रधान हाथ रहता है। जो व्यक्ति अपनी इस शक्ति का विकास नहीं कर पाये उन्हें अभाव और दरिद्रता में पलते हुए जीवन को समाप्त करना पड़ा। अविश्वासी व्यक्ति न तो किसी के सहायक हो पाते हैं और न दूसरों की आत्मीयता पूर्ण सहानुभूति ही प्राप्त कर पाते हैं।

🌹 *पं श्रीराम शर्मा आचार्य*

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