बुधवार, 23 नवंबर 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण Aatmchintan Ke Kshan 24 Nov 2016

🔴  अवांछनीय विचारों को मस्तिष्क में स्थान देने और उन्हें वहाँ जड़ जमाने का अवसर देने का अर्थ है भविष्य में हम उसी स्तर का जीवन जीने की तैयारी कर रहे हैं। भले ही यह सब अनायास ही हो रहा हो, पर उसका परिणाम तो होगा ही। उचित यही है कि हम उपयुक्त और रचनात्मक विचारों को ही मस्तिष्क में प्रवेश करने दें। यदि उपयोगी और विधायक विचारों का आवाहन करने और अपनाने का स्वभाव बना लिया जाये तो निःसंदेह प्रगति पथ पर बढ़ चलने की संभावनाएँ आश्चर्यजनक गति से विकसित हो सकती हैं।

🔵  समय गतिशील है। हाथ से निकला हुआ आज बीता हुआ कल हो जाता है। मनुष्य का जीवन काल ईश्वर ने निर्धारित करके उसे बताया नहीं है। जाने किस दिन बुलावा आ जाय। इसलिए समझदार व्यक्तियों ने यह सुझाव दिया है कि आज का काम कल पर नहीं रखना चाहिए, वरन् प्रयास यह करना चाहिए कि कल किया जाने वाला काम भी आज ही पूरा कर लिया जाये। हो सकता है कि कल जियें या न जियें।

🔴  शंकालु व्यक्ति अपने को चारों ओर से विपत्तियों के चक्रव्यूह में फँसा अनुभव करते हैं और हर व्यक्ति पर संदेह करते हैं। ऐसे लोग न तो किसी का प्यार पाते हैं, न सहयोग। उनकी अपनी आशंकाएँ ही इतनी बड़ी विभीषिका बन जाती है जो वास्तविक विपत्ति से भी अधिक अहितकर परिस्थितियाँ उत्पन्न कर देती है। आशंकाओं से ग्रसित व्यक्ति उस साहस, उत्साह और शुभ चिंतन से वंचित ही रह जाते हैं, जो प्रगति के लिए नितान्त आवश्यक है।

🌹 *~पं श्रीराम शर्मा आचार्य*

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