मंगलवार, 22 नवंबर 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण Aatmchintan Ke Kshan 23 Nov 2016

🔴  श्रम में शर्म, आलस्य या प्रमाद अधिक घर करते गये तो हमारी प्रगति अवरुद्ध होना निश्चित है। आलस्य की बढ़ती हुइ्र्र प्रवृत्ति व श्रम से जी चुराने की आदत हमें ऐसी स्थिति में ले जायेगी, जहाँ जीवन जीना भी कठिन होगा। प्रगति की किसी भी दिशा में अग्रसर होने के लिए सबसे पहला साधन श्रम ही है। जो जितना परिश्रमी होगा, उतना ही उन्नतिशील होगा।

🔵  जीवन एक संग्राम है, जिसमें विजय केवल उन्हें ही मिलती है, जो दृढ़ और उन्नत मनोबल का कवच धारण किये रहते हैं और जो अपने निहित पराक्रम तथा पौरुष की उत्कृष्टता सिद्ध करते हैं। शारीरिक स्वास्थ्य ठीक हो, पर मनोबल न हो तो आदमी मानसिक आघात से अकाल मृत्यु को प्राप्त होता है। अविकसित मनोबल के कारण हमारी योजनाएँ सफल नहीं होतीं। हमारा मन हारा रहता है तो शरीर भी हारता है।

🔴  मनुष्य सामर्थ्य का पुंज  और साहस का धनी है। उसमें न योग्यता की कमी है, न प्रतिज्ञा की। उसे विकसित किया जा सके तो छोटा दिखने वाला व्यक्ति अगले दिनों बड़ा बन सकता है। जिम्मेदारी समझने के लिए तैयार हो और जिम्मेदारी उठाने का साहस करे तो उसका निर्वाह करने का बल भी भीतर से ही प्रकट होगा। दूसरे लोग सहायता भी करेंगे और यह सिद्ध होगा कि अपनी तुच्छता और असमर्थता की आशंका निरर्थक थी और सफलता का डर जो बार-बार संकोच में डालता था सर्वथा निराधार था।

🌹 *~पं श्रीराम शर्मा आचार्य*

👉 हीरों से भरा खेत

🔶 हफीज अफ्रीका का एक किसान था। वह अपनी जिंदगी से खुश और संतुष्ट था। हफीज खुश इसलिए था कि वह संतुष्ट था। वह संतुष्ट इसलिए था क्योंकि वह ...