बुधवार, 16 नवंबर 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण Aatmchintan Ke Kshan 17 Nov 2016

🔴 जो लोग पिछले जीवन में कुमार्गगामी रहे हैं, वे भूले हुए, पथ भ्रष्ट तो अवश्य हैं, पर इस गलत प्रक्रिया द्वारा भी उन्होंने अपनी चैतन्यता, बुद्धिमत्ता, जागरूकता और क्रियाशीलता को बढ़ाया है। यह बढ़ोत्तरी एक अच्छी पूँजी है। पथ-भ्रष्टता के कारण जो पाप उनसे बन पड़े हैं, वे नष्ट हो सकते हैं उनके लिए निराशा की कोई बात नहीं, केवल अपनी रुचि और क्रिया सत्कर्म की ओर मोड़ने भर की देर  है। यह परिवर्तन होते ही बड़ी तेजी से सीधे मार्ग पर प्रगति होने लगेगी।

🔵 प्रलोभनों को देखकर मत फिसलो। पाप का आकर्षण आरंभ में बड़ा लुभावना प्रतीत होता है, पर अंत में धोखे की टट्टी सिद्ध होता है। जो चंगुल में फँस गया उसे तरह-तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाएँ सहनी पड़ती हैं। इसलिए प्रलोभनों में न फँसो। चाहे कितनी ही कठिनाई का सामना करना पड़े, पर कर्त्तव्य पर दृढ़ रहो। कर्त्तव्य पर दृढ़ रहने वाले मनुष्य ही सच्चे मनुष्य कहलाने के अधिकारी हैं।

🔴 मतभेदों की दीवारें गिराये बिना एकता, आत्मीयता, समता, ममता जैसे आदर्शों की दिशा में बढ़ सकना संभव नहीं हो सकता। विचारों की एकता जितनी अधिक होगी स्नेह, सद्भाव एवं सहकार का क्षेत्र उतना ही विस्तृत होगा। परस्पर खींचतान में नष्ट होने वाली शक्ति को यदि एकता में-एक दिशा में प्रयुक्त किया जा सके तो उसका सत्परिणाम देखते ही बनेगा।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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