रविवार, 13 नवंबर 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण Aatmchintan Ke Kshan 14 Nov 2016

🔴 प्रगति, समृद्धि की पगडण्डी कोई नहीं, केवल एक ही राजमार्ग है कि अपने व्यक्तित्व को समग्र रूप से सुविकसित किया जाय। ‘धूर्तता से सफलता’ का भौंडा खेल सदा से असफल होता रहा है और जब तक ईश्वर की विधि-व्यवस्था इस संसार में कायम है, तब तक यह क्रम बना रहेगा कि धूर्तता कुछ दिन का चमत्कार दिखाकर अंततः औंधे मुँह गिरे और अपनी दुष्टता का असहनीय दण्ड भुगते।

🔵 चापलूसों की प्रशंसा शत्रु की निन्दा से अधिक हानिकारक है। शत्रु निन्दा करके हमें हमारी त्रुटियों की याद दिलाते हैं और उन्हें सुधारने का प्रकारान्तर से प्रकाश देते हैं, जबकि खुश करने के फेर में पड़े हुए लोग जान या अनजान में हमें त्रुटि रहित बताते और मिथ्या अहंकार बढ़ाते हैं। हमें स्वयं ही अपना निष्पक्ष समीक्षक होना चाहिए तथा आलस्य, प्रमाद, कटुता, अपव्यय, असंयम, अधीरता, भीरुता आदि दुर्गुणों का जितना अंश पाया जा सके उसे ढूँढना चाहिए और उसके निराकरण की तैयारी करनी चाहिए।

🔴 आत्म-विश्वास बिना पंखों के आसमान पर उड़ने का नाम नहीं है। उसमें अपनी सामर्थ्य तौलनी पड़ती है, अनुभव, योग्यता और साधनों का मूल्यांकन करना पड़ता है और समीक्षापूर्वक इस नतीजे पर पहुँचना पड़ता है कि आज की स्थिति में किस हद तक साहस किया जा सकता है और कितनी ऊँची छलांग लगाई जा सकती है। जो वस्तुस्थिति की उपेक्षा करके हवाई महल चुनते हैं, उन्हें शेखचिल्ली की तरह उपहासास्पद बनना पड़ता है।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...