शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

👉 सफल जीवन के कुछ स्वर्णिम सूत्र (भाग 8) 19 Nov

 🌹 समय का मूल्य पैसे से भी अधिक

🔵 अमीर साहूकारों की दिनचर्या पर ध्यान दें तो मालूम पड़ेगा कि समय काटने के लिए उनने भी एक टाइम टेबिल बना रखा है। थोड़ा-बहुत ही आगा-पीछा होता है कि कोई यार-दोस्त आ धमके तब, नहीं तो सबेरे से उठकर हाथ-मुंह धोने, हजामत बनाने, चाय पीने, अखबार पढ़ने, भोजन करके विश्राम के लिये चले जाने, उठने पर चाय पीने, ताश खेलने, रात का टी.वी. देखने, दस बजे भोजन करने और सवेरे आठ बजे तक का बना-बनाया कार्यक्रम रहता है। यार-दोस्तों के आ धमकने पर जो काम अकेले करते थे वह कइयों द्वारा मिल-जुलकर होने लगता है। कभी-कभी इसमें सैर-सपाटा भी शामिल हो जाता है। पूछने पर वे भी अपने को व्यस्त बताते हैं।

🔴 स्त्रियों में ढेरों ऐसी होती हैं जिनके जिम्मे दोनों समय की रसोई होती है—दो-तीन आदमियों की। इसको भी वे लापरवाही से इस तरह करती हैं कि सारा दिन उसी में घूम जाता है। कहने को वे भी यही कहती हैं कि दिनभर लगे रहते हैं, फुरसत ही नहीं मिलती।

🔵 समय काटने के लिए कोई भी इससे मिलता-जुलता कार्यक्रम बना सकता है। शरीर यात्रा अपने आप में एक काम है। बाजार जाकर घर की चीजें खरीदना भी ढेरों समय ले जाता है। ऐसी दशा में किसी महत्वपूर्ण काम के लिए समय निकालना मुश्किल है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 *पं श्रीराम शर्मा आचार्य*

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