सोमवार, 14 नवंबर 2016

👉 सफल जीवन के कुछ स्वर्णिम सूत्र (भाग 5)

🌹 समय का सदुपयोग करना सीखें

🔵  इस ‘कल’ से बचने के लिए सन्त कबीर ने चेतावनी देते हुए कहा है— ‘काल करै सो आज कर, आज करै सो अब। पल में परलै होयगी, बहुरि करेगा कब।’’ अर्थात् कल पर अपने काम को न टाल। जिन्हें आज करना हो वे अभी ही पूरा कर लें। स्मरण रखा जाना चाहिए कि प्रत्येक काम का अपना अवसर होता है और अवसर वही है जब वह काम अपने सामने पड़ा है। अवसर निकल जाने पर काम का महत्व ही समाप्त हो जाता है तथा बोझ भी बढ़ता जाता है। मनीषी कहते हैं—‘‘बहुत से लोगों ने अपना काम कल पर छोड़ा है और वे संसार में पीछे रह गये, अन्य लोगों द्वारा प्रतिद्वन्दिता में हरा दिये गये।’’

🔴 नेपोलियन ने आस्ट्रिया को इसलिए हरा दिया कि वहां के सैनिकों ने उसका सामना करने में कुछ ही मिनटों की देर कर दी थी। लेकिन वहीं नेपोलियन वाटरलू के युद्ध में पराजित हुआ और बन्दी बना लिया गया क्योंकि उसका एक सेनापति ग्रुशी पांच मिनट विलम्ब से आया। इसी अवसर का सदुपयोग करके अंग्रेजों ने उसे कैद कर लिया। समय की उपेक्षा करने पर देखते-देखते विजय का पासा पराजय में पलट जाता है। लाभ हानि में बदल जाता है।

🔵 समय की चूक पश्चात्ताप की हूक बन जाती है। जीवन में प्रगति की इच्छा रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने किसी भी कर्तव्य को भूलकर भी कल पर न डालें जो आज किया जाना चाहिए। आज के काम के लिए आज का ही दिन निश्चित है और कल के काम के लिए कल का दिन निर्धारित है। आज का काम कल पर डाल देने से कल का भार दो गुना हो जायगा, जो निश्चित ही कल के समय में पूरा नहीं हो सकता। इस प्रकार आज का काम कल पर और कल का काम परसों पर ठेला हुआ काम इतना बढ़ जायगा कि वह फिर किसी भी प्रकार पूरा नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं जो काम हमें आज करने हैं, वह कल भी उतने ही महत्व के रहेंगे, यह नहीं कहा जा सकता। परिस्थितियां क्षण-क्षण बदलती रहती हैं और पिछड़े कार्यों का कोई महत्व नहीं रह जाता।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 धैर्य से काम

🔶 बात उस समय की है जब महात्मा बुद्ध विश्व भर में भ्रमण करते हुए बौद्ध धर्म का प्रचार कर रहे थे और लोगों को ज्ञान दे रहे थे। 🔷 एक ब...