गुरुवार, 27 अक्तूबर 2016

👉 व्यभिचार की ओर आकर्षित मत होना

🔴 व्यभिचार सबसे बड़ा विश्वासघात है। किसी स्त्री के पास तुम तभी तो पहुँच पाते हो जब उसके घरवाले तुम्हारा विश्वास करते हैं और उस तक पहुँच जाने देते हैं। कौन है जो किसी अपरिचित व्यक्ति के घर में निधड़क चला जावे और उससे मनचाही बातचीत करे। इसलिए सज्जनों! अपने मित्र के घर पर हमला मत करो। जरा पाप से डरो और हया शर्म का ख्याल रखो। क्या पाप, घृणा, बदनामी और कलंक का तुम्हें जरा भी डर नहीं है?

🔵 सद्गृहस्थ वह है जो पड़ौसी की स्त्री के रूप में अपनी माता की छाया देखता है। वीर वह है जो पराई स्त्री पर पाप की दृष्टि से नहीं देखता। स्वर्ग के वैभव का अधिकारी वह है जो स्त्रियों को माता, बहिन, और पुत्री समझता हुआ उनके चरणों में प्रणाम करता है।

🔴 मनुष्यों! व्यभिचार की ओर मत बढ़ो। यह जितना ही लुभावना है, उतना ही दुखदायी है। अग्नि की तरह यह सुनहरा चमकता है। पर देखो, जरा मूल से भस्म कर डालने की उसमें बड़ी घातक शक्ति है। इस सर्वनाश के मार्ग पर मत चलना, क्योंकि जिसने भी इधर कदम बढ़ाया है उसे भारी क्षति और विपत्ति का सामना करते हुए हाथ मल मलकर पछताना पड़ा है।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 अखण्ड ज्योति जुलाई 1944

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...