सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण Aatmchintan Ke Kshan 31 Oct 2016

🔴 हर मनुष्य में हर स्तर की क्षमता बीज रूप में विद्यमान है। प्रयत्नपूर्वक उन्हें जगाया और बढ़ाया जा सकता है। अधिक समय लगे और अधिक श्रम करना पड़े, यह बात दूसरी है, पर मंद गति कहे जाने वाले भी अध्यवसाय का सहारा लेकर उतने ही ऊँचे उठ सकते हैं, उतने ही सफल हो सकते हैं, जितने कि जन्मजात प्रतिभा वाले देखे जाते हैं।

🔵 जाति-पाँति के आधार पर किसी को हेय, हीन या छोटा समझना अध्यात्मवाद के सर्वथा विपरीत है। दुष्टता और सज्जनता के आधार पर किसी को नीच-ऊँच माना जाय, किसी कुकर्मी का तिरस्कार और श्रेष्ठ सत्पुरुष का सम्मान किया जाय यह बात दूसरी है, उसमें औचित्य है, पर केवल इसलिए किसी को नीच मानना कि वह अमुक जाति में पैदा हुआ है, सर्वथा अनुचित है।

🔴 जिस प्रकार बिजली से जीरो पावर का मद्धिम प्रकाश उत्पन्न होता है, उससे सौ किलोवाट का तेज चौंधिया देने वाली रोशनी का बल्ब भी जल सकता है। उसी प्रकार जिन शक्तियों और साधनों से हम अपना रोज का काम चलाते हैं, उन्हीं साधनों और शक्तियों से अपनी निर्धनता को भी दूर भगा सकते हैं, पर हमारी स्थिति ऐसी है जैसे इस उधेड़बुन में उलझे हुए व्यक्ति की जिसे जीरो पावर बल्ब को जलाने वाली बिजली की बड़ी सामर्थ्य पर ही शंका होती है। जिन क्षमताओं और शक्तियों का सहारा लेकर निर्धन से निर्धन और धनवान् से धनवान व्यक्ति अपना निर्वाह करते और काम चलाते हैं, वे हैं-बुद्धि, शक्ति, स्वास्थ्य और समय।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 ईश्वर क्या है?

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