शनिवार, 15 अक्तूबर 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण Aatmchintan Ke Kshan 16 Oct 2016

🔵 हम जो सफलता चाहते हैं, जिसके लिए प्रयत्नशील हैं, वह कामना कब तक पूरी हो जावेगी, इसका उत्तर सोचने से पूर्व अन्य परिस्थितियों को भुलाया नहीं जा सकता। अपना स्वभाव, सूझबूझ, श्रमशीलता, योग्यता, दूसरों का सहयोग, सामयिक परिस्थितियाँ, साधनों का अच्छा-बुरा होना, सिर पर लदे हुए तात्कालिक उत्तरदायित्व, प्रगति की गुंजाइश, स्वास्थ्य आदि अनेक बातों से सफलता संबंधित रहती है और सब बातें सदा अपने अनुकूल ही नहीं रहतीं, इसलिए केवल इसी आधार पर सफलता की आशा नहीं की जा सकती कि हमने प्रयत्न पूरा किया तो सफलता भी निश्चित रूप से नियत समय पर मिल ही जानी चाहिए।

🔴 मनुष्य दूसरों को मात्र नैतिक उपदेश ही देता रहे तो उससे किसी का काम नहीं बनता। समय पर सहायता मिलना, मुश्किलें और कठिनाइयाँ दूर करना, उपदेश देने की अपेक्षा अधिक उपयोगी है। इसी से किसी को कुछ ठोस लाभ प्राप्त हो सकता है और यही ईश्वर की सच्ची पूजा है।

🔵 प्रसन्न रह सकना इस संसार का बहुत बड़ा सुख है। हर कोई प्रसन्नता चाहता है, आनंद की खोज में है और विनोद तथा उल्लासमयी परिस्थितियों को ढूँढता है। यह आकाँक्षा निश्चय ही पूर्ण हो सकती है यदि हम बुराइयों की उपेक्षा करना और अच्छाइयों से लिपटे रहना पसंद करें। इस संसार में सभी कुछ है। अच्छाई भी कम नहीं है। बुरे आदमियों में  भी अच्छाई ढूँढें, आपत्तियों से जो शिक्षा मिलती है उसे कठोर अध्यापक द्वारा कान ऐंठकर दी हुई सिखावन की तरह सीखें। उपकारों को स्मरण रखें। जहाँ जो कुछ श्रेष्ठ हो रहा है उसे सुनें और समझें। अच्छा देखो और प्रसन्न रहो का मंत्र हमें भली प्रकार जपना और हृदयंगम करना चाहिए।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...