सोमवार, 19 सितंबर 2016

👉 Aatmchintan Ke Kshan आत्मचिंतन के क्षण 21 Sep 2016


🔴 जिज्ञासा सबसे बड़ा गुण है। महत्त्वाकाँक्षी होना अच्छा है, परन्तु सही मार्ग खोजने के लिए, न कि बुराइयों को प्रोत्साहन देने के लिए। ज्ञान की भूख पूरी करने और सही दिशा की  ओर ले जाने से मनुष्य विद्वान् बन जाता है।

🔵 जीवन में सफलता पाने के लिए आत्म- विश्वास उतना ही जरूरी है, जितना जीने के लिए भोजन। कोई भी सफलता बिना आत्म- विश्वास के मिलना असंभव है। आत्म-विश्वास वह शक्ति है, जो तूफानों को मोड़ सकती है, संघर्षों से जूझ सकती और पानी में भी अपना मार्ग खोज लेती है।

🔴 यह विचार सही नहीं है कि सम्पत्ति बढ़ जाने से मनुष्य का स्तर ऊँचा उठता है और प्रगतिशील परिस्थितियाँ बनती चली जाती हैं। यह तथ्य आंशिक रूप से ही सत्य है। भौतिक जीवन में अधिक सुविधा साधन मिलें यह बहुत अच्छी बात है, उससे विकास क्रम में सहायता मिलती है, पर यह यथार्थता भी भुला देने योग्य नहीं है कि घटिया व्यक्तित्व एक तो प्रगति कर ही नहीं सकेंगे, यदि कर भी लेंगे तो उपलब्ध साधनों का दुरुपयोग करके उलटे और विपत्ति के दलदल में फँसेंगे।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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