गुरुवार, 14 सितंबर 2017

👉 भिखारी ने लौटाया धन

🔵 किसी नगर में एक भिखारी भीख माँगा करता था और वह वंहा पर एक कटोरा लेकर बैठा होता जिसे कुछ देकर जाना होता वो उस कटोरे में डालकर चला जाता। वर्षों से यही चल रहा था और वह सुबह आकर वंहा बैठा जाता और शाम को अँधेरा होने से पहले वंहा से चला जाया करता। कभी किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि वो कन्हा से आता है और कन्हा जाया करता है।

🔴 वह अन्य भिखारियों की तरह गिडगिडाता भी नहीं था हाँ जब भी कोई आता तो अपना कटोरा आगे कर देता कि जिसको मन होता वह डालकर चला जाता और जिसका मन नहीं होता वो आगे बढ़ जाता लेकिन भिखारी को किसी से कोई शिकायत नहीं थी एक दिन क्या होता है कि एक आदमी आया उसकी चाल ढाल और महंगे कपडे देख कर और गले मे पड़ी सोने की चैन को देखकर लगता था जैसे वो कोई बहुत ही बड़े घर का आदमी है यही जानकार भिखारी ने भी अपने कटोरे को आगे कर दिया लेकिन वो आदमी ने इस तरह मुह बनाया जैसे कोई कडवी चीज़ उस के मुह में आ गयी हो लेकिन फिर अनमने मन से उनसे अपनी जेब से चवन्नी निकली और कटोरे की जगह नीचे फेंककर आगे बढ़ गया।

🔵 भिखारी वह सब हरकतें देख रहा था उसने आव देखा न ताव और चवन्नी को उठाकर उसकी और फेंकते हुए बोला ये ले अपनी दौलत मुझे तुम जैसे गरीब का पैसा नहीं चाहिए उस अमीर आदमी के पैर वही ठिठक गये। तभी उसे एक धर्म ग्रन्थ में पढ़ी हुई एक बात याद आ गयी की जिस दान के साथ दानदाता खुद को नहीं देता वह दान व्यर्थ है इसलिए उसे अपने किये पर शर्मिंदगी महसूस हुई।

🔴 जिसके पास दिल नहीं है दूसरों के दर्द को समझने की भावना नहीं है उसके पास करोडो की सम्पति होते हुए भी वो गरीब है।

👉 लक्ष्मीजी का निवास

🔶 एक बूढे सेठ थे। वे खानदानी रईस थे, धन-ऐश्वर्य प्रचुर मात्रा में था परंतु लक्ष्मीजी का तो है चंचल स्वभाव। आज यहाँ तो कल वहाँ!! 🔷 सेठ ...