शनिवार, 24 दिसंबर 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण 25 Dec 2016

 🔴 युग निर्माण परिवार के हर सदस्य को अपनी उदारता का स्तर और आगे बढ़ाना चाहिए। दस पैसा रोज और एक घंआ समय आरंभिक प्रतीक पूजा थी। अभ्यास के रूप में इतना छोटा ही श्रीगणेश कराया गया था, वह अंतिम नहीं न्यूनतम था। गुजारा भर कर पाने वालों को भी महीने में एक दिन की कमाई देनी चाहिए, ताकि उनके बदले में एक कार्यकर्त्ता उसकी रोटी खोकर सर्वग्राही असुरता से लड़ने के लिए खड़ा रह सके।

🔵 वर्ग भेद उत्पन्न करने वाली हर प्रवृत्ति को निरुत्साहित किया जाना चाहिए। जाति, वर्ण, भाषा, देश, धर्म, संस्कृति आदि के नाम पर इतने विभेद पिछले दिनों खड़े कर दिये गये हैं कि उनने न केवल आदमी-आदमी के बीच खाई खोदी है, वरन् परस्पर एक दूसरे को बिराना, अपरिचित, विरोधी और शत्रु भी बना दिया है। जब तक यह दीवारें गिराई नहीं जायेंगी, प्रथकतावादी संकीर्णता के रक्त-रंजित पंजे मनुष्य की छाती में गढ़े ही रहेंगे।

🔴 यदि हमें मानवी एकता का लक्ष्य प्राप्त करना है और ज्ञान की परिधि को विश्वव्यापी बनाना है, तो एक विश्व-भाषा बनाये बिना काम चल ही नहीं सकता। आरंभ में एक क्षेत्रीय भाषा इस प्रकार से भी  रह सकती है पर उन दोनों को ही सीखना अनिवार्य होना चाहिए। पीछे क्षेत्रीय भाषाओं का झंझट मिटाया जा सकता है और दुहरा वजन ढोने से इनकार भी किया जा सकता है।

🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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