गुरुवार, 20 अप्रैल 2017

👉 समय का सदुपयोग करें (भाग 13)

🌹 समय जरा भी नष्ट मत होने दीजिये

🔴 संसार में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं जिसकी प्राप्ति मनुष्य के लिये असम्भव हो। प्रयत्न और पुरुषार्थ से सभी कुछ पाया जा सकता है लेकिन एक ऐसी भी चीज है जिसे एक बार खोने के बाद कभी नहीं पाया जा सकता और वह है—समय। एक बार हाथ से निकला हुआ समय फिर कभी हाथ नहीं आता। कहावत है ‘‘बीता हुआ समय और कहे हुए शब्द कभी वापस नहीं बुलाये जा सकते।’’ समय परमात्मा से भी महान् है। भक्ति साधना द्वारा परमात्मा का साक्षात्कार कई बार किया जा सकता है लेकिन गुजरा हुआ समय पुनः नहीं मिलता।

🔵 समय ही जीवन की परिभाषा है, क्योंकि समय से ही जीवन बनता है। समय का सदुपयोग करना जीवन का उपयोग करना है। समय का दुरुपयोग करना जीवन का नष्ट करना है। समय किसी की भी प्रतीक्षा नहीं करता। वह प्रतिक्षण, मिनट, घन्टे, दिन, महलने, वर्षों के रूप में निरन्तर अज्ञात दिशा को जाकर विलीन होता रहता है। समय की अजस्र धारा निरन्तर प्रवाहित होती रहती है और फिर शून्य में विलीन हो जाती है फ्रैंकलिन ने कहा है—‘‘समय बरबाद मत करो क्योंकि समय से ही जीवन बना है।’’ निस्सन्देह वक्त और सागर की लहरें किसी की प्रतीक्षा नहीं करतीं हमारा कर्तव्य है कि हम समय का पूरा पूरा सदुपयोग करें।

🔴 सचमुच जो व्यक्ति अपना तनिक सा भी समय व्यर्थ नष्ट करते हैं उन्हें समय अनेकों सफलताओं से वंचित कर देता है। नेपोलियन ने आस्ट्रेलिया को इसलिए हरा दिया कि वहां के सैनिकों ने पांच ही मिनटों का विलम्ब कर दिया उसका सामना करने में। लेकिन वही नेपोलियन कुछ ही मिनटों में बन्दी बना लिया गया क्योंकि उसका एक सेनापति कुछ ही मिनट विलम्ब से आया। वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन की पराजय इसी कारण से हुई। समय की उपेक्षा करने पर देखते देखते विजय का पासा पराजय में पलट जाता है लाभ हानि में बदल जाता है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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