सोमवार, 17 अप्रैल 2017

👉 समय का सदुपयोग करें (भाग 10)

🌹 समय जो गुजर गया, फिर न मिलेगा

🔴 समर्थ स्वामी रामदास वक्त के सदुपयोग के बारे में बड़े महत्त्वपूर्ण शब्द कहा करते थे—
एक सदैव पणाचैं लक्षण।
रिकामा जाऊँ ने दो एक क्षण।।
(दासबोध—11—24)

🔵 अर्थात्— ‘‘जो मनुष्य वक्त का सदुपयोग करता है, एक क्षण भी बरबाद नहीं करता, वह बड़ा सौभाग्यवान् होता है।’’ धन और रुपये-पैसे के मामले में यह कहा जाता है कि जिसका खर्च व्यवस्थित और मितव्ययी होता है, वही जीवन पर्यन्त धन का सुख लाभ प्राप्त करता है, उसके खजाने में किसी प्रकार की कमी नहीं आती। ऐसे ही समय के प्रत्येक क्षण का उपयोग कर लेना भी मनुष्य की बुद्धिमत्ता का प्रतीक है उन्नति की इच्छा रखने वालों को अपना समय कभी भी व्यर्थ न गंवाना चाहिये। समय के सदुपयोग करने में सदैव सावधान रहना चाहिये। आज जो समय गुजर गया, कल वह फिर आने वाला नहीं।

🔴 कार्य चाहे व्यावहारिक हो अथवा पारमार्थिक, जो समय सम्बन्धी विवेक और सावधानी नहीं रखते उन्हें इसके दुष्परिणाम जन्म-जन्मान्तरों तक भुगतने पड़ते हैं। आज अपने पास सभी परिस्थितियां हैं, साधन हैं। मनुष्य शरीर मिला है, बुद्धि और विचार की बहुमूल्य विरासत जो हमें मिली है वह यह समझ लेने के लिये है कि आपका समय सीमाओं से प्रतिबन्धित है। सृष्टि के दूसरे जीवों में से कई तो लम्बी आयु वाले भी होते हैं किन्तु मनुष्य की अवस्था अधिक से अधिक सौ वर्ष है। उसमें भी कितना समय अवस्था के अनुरूप व्यर्थ चला जाना है फिर जो शेष बचता है उसका उपयोग यदि सांसारिक और आध्यात्मिक विकास के लिए नहीं कर पाये तो कौन जाने यह परिस्थितियां फिर कभी मिलेंगी या नहीं।

🔵 आध्यात्मिक जीवन व्यतीत करने वाले भी जब समय का ठीक ठीक उपयोग नहीं कर पाते, इस सम्बन्ध में जागरुक और विवेकशील नहीं होते तो बड़ा आश्चर्य होता है। इससे अच्छे तो वे लोग ही हैं जो बेचारे किसी प्रकार जीवन-निर्वाह के साधन और आजीविका जुटाने में ही लगे रहते हैं। उन्हें यह पछतावा तो नहीं होता कि जीवन के बहुमूल्य क्षणों का पूर्ण उपयोग नहीं कर सके। आजीविका भी अध्यात्म का एक अंग है अतएव सम्पूर्ण न सही, कुछ अंशों में तो उन्होंने मानव-जीवन का सदुपयोग किया। 

🔴 हाथ पर हाथ रखकर आलस्य में, समय गंवाने वाले सामाजिक जीवन में गड़बड़ी ही फैलाते हैं भले ही वे कितने ही बुद्धिमान, भजनोपदेशक, कथावाचक, पण्डित या सन्त-संन्यासी ही क्यों न हों। समय का सदुपयोग करने वाला घसियारा, बेकार बैठे रहने वाले पण्डित से बढ़कर है क्योंकि वह समाज को किसी न किसी रूप में समुन्नत बनाने का प्रयास करता ही है।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 लक्ष्मीजी का निवास

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