सोमवार, 12 दिसंबर 2016

👉 हमारी युग निर्माण योजना (भाग 44)

🌹 विभूतिवान व्यक्ति यह करें

🔴 विशिष्ट प्रतिभावान व्यक्ति अपने विशेष व्यक्तित्व के द्वारा युग-निर्माण की दिशा में विशेष कार्य कर सकते हैं। कलाकारों का योग इस सम्बन्ध में विशेष रूप से अभीष्ट है। लेखक, कवि, वक्ता, संगीतज्ञ, चित्रकार, धनी, विद्वान, राजनीतिज्ञ, यदि चाहें तो अपनी विभूतियों का सदुपयोग करके नव-निर्माण के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। इस प्रकार के प्रतिभा सम्पन्न व्यक्तियों के सामने युग-निर्माण योजना निम्न सुझाव प्रस्तुत करती है:—

🔵 61. लेखकों और पत्रकारों से अनुरोध— देश की विभिन्न भाषाओं में जो लेखक और कवि आज कल लेखन कार्य में लगे हुए हैं, उनसे सम्पर्क बना कर यह प्रेरणा दी जाय कि वे युग-निर्माण की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिखा करें। इसी प्रकार जो पुस्तक प्रकाशक एवं पत्रकार साहित्य प्रकाशन का कार्य हाथ में लिए हुए हैं, उन्हें मानव जीवन में प्रकाश भरने वाला साहित्य छापने की प्रेरणा की जाय। समाचार-पत्र एवं पुस्तक-विक्रेताओं से भी यही अनुरोध किया जाय कि उन वस्तुओं के विक्रय में विशेष ध्यान दें जो जन कल्याण के लिए उपयोगी एवं आवश्यक है। इसी प्रकार वर्तमान साहित्य क्षेत्र में लगे हुए लोगों से सम्पर्क स्थापित करके उन्हें युग की आवश्यकता पूर्ण करने की प्रेरणा दी जाय।

🔴 62. युग-साहित्य के नव निर्माता— इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में विशेष मनोयोग-पूर्वक युग की आवश्यकता पूर्ण करने के लिए मिशनरी ढंग से काम करने वाले लेखकों एवं कवियों का एक विशेष वर्ग तैयार किया जाय जो साहित्य-निर्माण कार्य को अपना प्रधान सेवा-साधन बनाकर तत्परतापूर्वक इसी कार्य में लग सकें। ऐसे अनेक व्यक्ति मौजूद हैं जिनमें इस प्रकार की प्रतिभा और सेवा भावना पर्याप्त मात्रा में मौजूद है, पर आवश्यक साधन, मार्ग दर्शन एवं प्रोत्साहन न मिलने से वे अविकसित ही पड़े रहते हैं। अपना प्रयत्न ऐसे लोगों को संगठित एवं विकसित करने का हो। इस अभिरुचि एवं योग्यता के लोगों को ढूंढ़ना, उन्हें इकट्ठा करना और आवश्यक प्रशिक्षण देकर इस योग्य बनाना हमारा काम होगा कि वे कुछ ही दिनों में युग-निर्माता साहित्यकारों की एक भारी आवश्यकता की पूर्ति कर सकें। ‘अखण्ड-ज्योति परिवार’ में इस प्रतिभा के जो लोग होंगे उन्हें सर्व-प्रथम तैयार करेंगे और उनको आवश्यक शिक्षा देने के लिए जल्दी-जल्दी ही शिविरों की श्रृंखला आरम्भ करेंगे।

🌹 क्रमशः जारी
🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

👉 भावनाएँ भक्तिमार्ग में नियोजित की जायें (भाग 1)

🔶 भावनाओं की शक्ति भाप की तरह हैं यदि उसका सदुपयोग कर लिया जाय तो विशालकाय इंजन चल सकते हैं पर यदि उसे ऐसे ही खुला छोड़ दिया जाय तो वह...