मंगलवार, 21 जून 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण 21 June 2016


🔴  उन्नति के लिए चाहे कितने ही व्यक्ति सहानुभूति व्यक्त क्यों न करें, पर यह निर्विवाद है कि हमारा इससे कुछ काम न चलेगा। हमें अपनी स्थिति स्वयं सुधारनी होगी। स्वयं कठिनाइयों से लड़कर नया निर्माण करना पड़ेगा। विशृंखलित शक्तियों को जुटाकर आगे बढ़ने का कार्यक्रम बनाना पड़ेगा। यह बात यदि समझ में आ जाय तो सफलता की आधी मंजिल तय कर ली ऐसा समझना चाहिए। शेष आधे के लिए मनोबल जुटाकर यत्नपूर्वक आगे बढ़िये आपका सौभाग्य आपके मंगल मिलन के लिए प्रतीक्षा कर रहा है।

🔵  मानसिक अशान्ति एक ऐसा आंतरिक आंदोलन है, जिसके उठने से मनुष्य  का विवेक, विचार एवं ज्ञान नष्ट हो जाता है। उसकी बुद्धि असंतुलित हो जाती है, जिसके फलस्वरूप वह अशान्ति के कारणों का निराकरण कर सकने में सर्वथा असमर्थ रहता है और यदि उद्विग्न अवस्था में कोई उलटे सीधे प्रयत्न करता भी है तो उसके परिणाम उलटे ही निकलते हैं।

🌹 -पं श्रीराम शर्मा आचार्य

🔵 पूर्णतः निःस्वार्थ रहो, स्थिर रहो, और काम करो। एक बात और है। सबके सेवक बनो और दूसरों पर शासन करने का तनिक भी यत्न न करो, क्योंकि इससे ईर्ष्या उत्पन्न होगी और इससे हर चीज़ बर्बाद हो जायेगी। आगे बढो तुमने बहुत अच्छा काम किया है। हम अपने भीतर से ही सहायता लेंगे अन्य सहायता के लिए हम प्रतीक्षा नहीं करते। मेरे बच्चे, आत्मविशवास रखो, सच्चे और सहनशील बनो।
(वि.स.4/284)

🌹 -स्वामी विवेकानन्द

प्रभु से प्रार्थना (Kavita)

प्रभु जीवन ज्योति जगादे! घट घट बासी! सभी घटों में, निर्मल गंगाजल हो। हे बलशाही! तन तन में, प्रतिभापित तेरा बल हो।। अहे सच्चिदानन्द! बह...