गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

👉 अपने में अच्छी आदतें डालिए। (अंतिम भाग)

🔵 आज जो आदतें पड़ी हुई हैं किसी समय वह भी नई रहीं होगी और उनको अपने पैर जमाने में अपने से पुरानी आदतों के साथ उसी प्रकार संघर्ष करना पड़ा होगा जैसा कि आज नई आदतें डालने की हमारी इच्छा को पुरानी आदतों से संघर्ष करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में निराश होने का कोई कारण नहीं। जब पूर्वकाल में पुरानी आदतों को हटाकर नई आदतें डालने में हम सफल हो चुके हैं तो कोई कारण नहीं कि अब फिर वैसा न किया जा सके।

🔴 ईश्वर का अस्तित्व, जीवन की हर एक स्थिति में, हर जगह और हर समय ध्यान में रखना हमारी एक स्वाभाविक आदत होनी चाहिए और इस आदत का बीजारोपण जीवन के शुरुआत से ही करना चाहिए। क्योंकि यह आदत जीवन की श्रेष्ठतम आदतों में सर्वोपरि महत्व की है।

🔵 जो मनुष्य ईश्वर पर विश्वास करता है, सदैव उसका ध्यान रखता है, हर जगह उसकी सत्ता को देखता है वह पाप कर्म नहीं कर सकता। जो ईश्वर विश्वासी है वह परम निर्भय रहता है, उसे मृत्यु का, हानि का, रोग का, वियोग का, आक्रमण का, ठगी का या किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता। ईश्वर भक्त सदा ही निर्भय और निर्बन्ध रहते हैं।

🔴 आप अच्छी आदतें डालिए। क्योंकि आदतों से ही मनुष्य की जीवन धारा का निर्माण होता है। ईश्वर परायणता, आस्तिकता सब से अच्छी आदत है, क्योंकि उसके साथ-साथ वे सभी आदतें अपने आप अपने में आ जाती हैं जो जीवन को सुख शान्तिमय बनाने के लिए परम आवश्यक हैं।

🌹 समाप्त
🌹 अखण्ड ज्योति- जून 1949 पृष्ठ 28

http://literature.awgp.org/magazine/AkhandjyotiHindi/1949/June.28

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