रविवार, 4 सितंबर 2016

👉 अंतर्मुखी होने पर ही शांति 👉 Look Introvert for Peace

🔴 अपनी दृष्टि को बाहर से हटाकर अंदर डालना चाहिए, अध्यात्म-पथ का अवलंबन लेना चाहिए। जगत् में इधर-उधर भटकने वाला प्राणी इसी शीतल वृक्ष के नीचे शांति प्राप्त कर सकता है।

🔵 जब बाहर की माया रूपी वस्तुओं के भ्रम से विमुख होकर हम अंतर्मुखी होते हैं, आत्मचिंतन करते हैं, तो प्रतीत होता है कि हम अपने स्थान से बहुत दूर भटक गए थे। आवश्यकताएँ कभी पूर्ण नहीं हो सकती हैं, उन्हें जितना ही तृप्त करने का प्रयत्न किया जाएगा, उतना ही वे अग्नि में घृत डालने की तरह और अधिक बढ़ती जाएँगी। इसलिए इस छाया के पीछे दौड़ने की अपेक्षा उसकी ओर से पीठ फेरनी चाहिए और सोचना चाहिए कि हम कौड़ियों के लिए क्यों मारे-मारे फिर रहे हैं, जब कि हमारे अपने घर में भंडार भरा हुआ है। अंतर में मुँह देखने पर, परमात्मा के निकट उपस्थित होने पर, वह ताली मिल जाती है, जिससे सुख और शांति के अक्षय भंडार का दरवाजा खुलता है।

🔴 अपनी वास्तविक स्थिति को जानने से, आत्मस्वरूप को पहचानने से, संसार के स्वरूप का सच्चा ज्ञान होने से, शांति की शीतल धारा प्रवाहित होती है, जिसके तट पर असंतोष की ज्वाला जलती हुई नहीं रह सकती। सच्चा संतोष उपलब्ध होे पर उसकी बाह्य आवश्यकताएँ बहुत ही थोड़ी रह जाती हैं और जब थोड़ा चाहने वाले को बहुत मिलता है, तो उसे बड़ा आनन्द प्राप्त होता है।

🌹 -अखण्ड ज्योति -मार्च 1941 पृष्ठ 19


👉 Look Introvert for Peace


🔵 If you are looking for introvert peace, you must follow the path to spirituality. For this you must turn your extrovert sight inwardly. A bewildered fellow deluded and tired of wandering in the hazy mist of external world, finds immense peace and light in the inner world.

🔴 When we understand the illusory nature of the gamut of things and activities in the world around and get introvert, ponder over our inner self, only then we realize that we had lost our way all these days; our cravings, materialistic needs and passions were driving our life and we were running behind the mirage of happiness. But nor we know that nothing can ever satisfy the passions, no one can ever fulfill his ambitions. Attempting to do so is like pouring petrol in fire. Thus, instead of running behind the shadow to catch it, we must turn our back to it. Having a glimpse of the inner treasure detaches us from the perishable pennies for which we had been wasting all our potentials and time. Introvert search takes us near the God and shows the key to infinite joy and peace.

🔵 Once we know our real self, grasp the reality of the world, and see the inner light, the nectar-spring of unprecedented peace erupts from within and extinguishes the flames of discontent, desperations and tensions forever. With the rise of the feeling of true fulfillment, there hardly remains any worldly need or desire; every thing in hand or gifted by Nature for survival suffices and every circumstance becomes a source of expanding you.

🌹 -Akhand Jyoti, March 1941

👉 ईश्वर क्या है?

🔶 टेहरी राजवंश के 15-16 वर्षीय राजकुमार के हृदय में एक  प्रश्न उठा  ईश्वर क्या है? 🔷 वह स्वामी रामतीर्थ के चरणों में पहुँचा और प्रणाम ...