मंगलवार, 6 सितंबर 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण 6 Sep 2016

🔴 यदि हम वास्तव में कोई उत्तम कार्य करना चाहते हैं, तो समय का रोना न रोते रहें।  हमारी परिस्थिति, दुनिया की उलझनें तो यों ही चलती रहेंगी और हम सोते-सोते ही पूर्ण आयु समाप्त कर डालेंगे। समय अति अल्प है और हमें कार्य अत्यधिक करना है। वायुवेग से हमारा अमूल्य जीवन कम हो रहा है। समय का अपव्यय जितना रोक सकें, रोकें अवश्य।

🔵 सत्य की कसौटी यह नहीं है कि उसे बहुत, बूढ़े और धनी लोग ही कहते हों। सत्य हमेशा उचित, आवश्यक, न्याययुक्त तथ्यों से एवं ईमानदारी से भरा हुआ होता है। थोड़ी संख्या में, कम उम्र के, गरीब आदमी भी यदि ऐसी बात को कहते हैं तो वह मान्य है। अकेली आपकी आत्मा ही यदि सत्य की पुकार करती है तो वह पुकार लाखों मूर्खों की बक-बक से अधिक मूल्यवान् है।

🔴 अनीति से धन कमाना बुरा है, संपूर्ण शक्तियों को धन उपार्जन में ही लगाये रहना बुरा है, धन का अतिशय मोह, अहंकार, लालच बुरा है, धन के नशे में उचित-अनुचित का विचार छोड़ देना बुरा है, परन्तु यह किसी भी प्रकार बुरा नहीं है कि जीवन निर्वाह की उचित आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ईमानदारी और परिश्रमशीलता के साथ धन उपार्जन किया जाय।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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