सोमवार, 12 सितंबर 2016

👉 Aatmchintan Ke Kshan आत्मचिंतन के क्षण 12 Sep 2016


🔴 प्रकृति चाहती हे कि हर व्यक्ति सजग और सतर्क रहे,  सावधानी बरते और घात-प्रतिघात से कैसे बचा जाता है इस कला की जानकारी प्राप्त करे। सज्जन होना उचित है, पर मूर्ख होना अक्षम्य है। हम दूसरों की सेवा-सहायता विवेकपूर्वक करें, यह ठीक है, पर कोई मूर्ख अथवा कमजोर समझकर अपनी घात चलाये और ठग ले जाय, यह अनुचित है।

🔵 धोखा किसी को भी नहीं देना चाहिए, पर धोखा खाना कहाँ की बुद्धिमानी है। हमें हर किसी पर पूरा विश्वास करना चाहिए, साथ ही पैनी निगाह से यह देखते रहना चाहिए कि कहीं असावधानी से वह अवसर तो उत्पन्न नहीं हो रहा है, जिसमें दुर्बल मन मनुष्य का अविश्वासी बन जाना संभव है।

🔴 हमें किसी के साथ अनीति नहीं बरतनी चाहिए, पर अन्याय को भी सहन नहीं करना चाहिए। संघर्ष के बिना कोई छुटकारा नहीं। प्रतिरोध में हानि उठानी पड़ सकती है, पर प्रतिरोध न करने में-चुपचाप अनीति सहते रहने में और भी अधिक घाटे में रहना होगा। अनीति बरतने की प्रक्रिया तभी गतिशील रहती है, जब उसका अवरोध न हो। अनीति को हम कदापि सहन न करें, भले ही उसके प्रतिरोध में कितनी ही बड़ी क्षति क्यों न उठानी पड़े।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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