शनिवार, 6 अगस्त 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण 6 AUG 2016


🔴 किसी व्यक्ति के कहने से अथवा किसी आपत्ति के आने से अपने आत्म-विश्वास को डगमगाने मत दो। कदाचित् आप अपनी संपत्ति, स्वास्थ्य, यश और  सम्मान खो बैठो, पर जब तक आप अपने ऊपर श्रद्धा कायम रखोगे, तब तक आपके लिए आशा है। यदि आत्म-श्रद्धा को कायम रखोगे और आगे बढ़ते रहोगे तो जल्दी या देर में संसार आपको रास्ता देगा ही।

🔵 समाज में हो रही बुराइयों को रोकने के लिए ईश्वर ने सामूहिक जिम्मेदारी हर व्यक्ति को सौंपी है। उनका कर्त्तव्य है कि अनीति जहाँ कहीं भी हो रही है, उसे रोकें, घटाने का प्रयत्न करें, विरोध करें, असहयोग बरतें। जो भी तरीका अनुकूल जँचे उसे अपनायें, पर कम से कम उस बुराई में अपना सहयोग प्रत्यक्ष और परोक्ष किसी भी रूप से न हो।

🔴 मेरे कारण दूसरों का भला हुआ-यह सोचना मूर्खता है। हमारे बिना संसार का कोई काम अटका न रहेगा। हमारे पैदा होने से पहले संसार का सब काम ठीक-ठीक चल रहा था और हमारे बाद भी वैसा ही चलता रहेगा। परमात्मा उतना गरीब नहीं है कि हमारी मदद के बिना सृष्टि का काम न चला सके।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी

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