गुरुवार, 4 अगस्त 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण 4 AUG 2016


🔴 जिसने अनीति के मार्ग पर चलकर धन कमाया, उनकी वह कमाई चोरी, बीमारी, विलासिता, मुकदमा, नशा, रिश्वत, व्यभिचार आदि बुरे मार्गों में खर्च होती देखी गई है। जैसे आई थी, वैसे ही चली जाती है। पश्चाताप, पाप और निन्दा का ऐसा उपहार अंततः वह छोड़ जाती है, जिसे देखकर वह कुमार्गगामी अपनी नासमझी पर दुःख ही अनुभव करता रहता है।

🔵 परस्पर प्रोत्साहन न देना हमारे व्यक्तिगत सामाजिक जीवन की एक बहुत बड़ी कमजोरी है। किसी को प्रोत्साहन भरे दो शब्द कहने के बजाय लोग उसे खरी-खोटी असफलता की बातें कर निरुत्साहित करते हैं, हिम्मत तोड़ते हैं, जिससे दूसरों को निराशा, असंभावनाओं का निर्देश मिलता है और हमारे सामाजिक विकास में गतिरोध पैदा हो जाता है।

🔴 दूसरों को सुधारने से पहले हमें अपने सुधार की बात सोचनी चाहिए। दूसरों की दुर्बलता के प्रति एकदम आगबबूला हो उठने से पहले हमें यह भी देखना उचित है कि अपने भीतर कितने दोष-दुर्गुण भरे पड़े हैं। बुराइयों को दूर करना एक प्रशंसनीय प्रवृत्ति है। अच्छे काम का प्रयोग अपने से ही आरंभ करना चाहिए। हम सुधरें-हमारा दृष्टिकोण सुधरे तो दूसरों का सुधार होना कुछ भी कठिन नहीं।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...