रविवार, 14 अगस्त 2016

👉 आत्मचिंतन के क्षण 14 AUG 2016


🔴 उतावले और जल्दबाज, असंतुष्ट और उद्विग्न व्यक्ति एक प्रकार के अधपगले कहे जा सकते हैं वे जो कुछ चाहते हैं उसके तुरन्त ही प्राप्त हो जाने की कल्पना किया करते हैं। यदि जरा भी देर लगती है तो अपना मानसिक संतुलन खो बैठते हैं और प्रगति के लिए अत्यन्त आवश्यक गुण मानसिक स्थिरता को खोकर असंतोष रूपी उस भारी विपत्ति को कंधे पर ओढ़ लेते हैं, जिसका भार लेकर उन्नति की दिशा में कोई आदमी देर तक नहीं चल सकता।
 
🔵 अपनी आलोचना कर सकना, आत्म-निरीक्षण करके अपनी बुराइयाँ ढूँढना और उन्हें सुधारने के लिए तत्पर होना सचमुच ही एक बड़ी बहादुरी और दूरदर्शिता का काम है। जिसमें इतना साहस आ गया, उसे सच्चे अर्थों में आध्यात्मिक व्यक्ति कहा जा सकता है।
 
 🔴 बड़प्पन की इच्छा सबको होती है, पर बहुत कम लोग यह जानते हैं कि उसे कैसे प्राप्त किया जाय। जो जानते हैं वे उस ज्ञान को आचरण में लाने का साहस नहीं करते। आमतौर से यह सोचा जाता है कि जिसका ठाटबाट जितना बड़ा है वह उसी अनुपात से बड़ा माना जाएगा। मोटर, बंगला, सोना, जायदाद, कारोबार, सत्ता, पद आदि के अनुसार किसी को बड़ा मानने का रिवाज चल पड़ा है। इससे प्रतीत होता है कि लोग मनुष्य के व्यक्तित्व को नहीं, उसकी दौलत को बड़ा मानते हैं- यह दृष्टिदोष ही है।

🌹 पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी

👉 Awakening the Inner Strength

🔶 Human life is a turning point in the evolution of consciousness. One who loses this opportunity and does not attempt awakening his in...