मंगलवार, 21 मार्च 2017

👉 कहाँ छुपी हैं शक्तियां!

🔴 एक बार देवताओं में चर्चा हो रहो थी, चर्चा का विषय था मनुष्य की हर मनोकामनाओं को पूरा करने वाली गुप्त चमत्कारी शक्तियों को कहाँ छुपाया जाये। सभी देवताओं में इस पर बहुत वाद- विवाद हुआ। एक देवता ने अपना मत रखा और कहा कि इसे हम एक जंगल की गुफा में रख देते हैं। दूसरे देवता ने उसे टोकते हुए कहा नहीं- नहीं हम इसे पर्वत की चोटी पर छिपा देंगे। उस देवता की बात ठीक पूरी भी नहीं हुई थी कि कोई कहने लगा, न तो हम इसे कहीं गुफा में छिपाएंगे और न ही इसे पर्वत की चोटी पर हम इसे समुद्र की गहराइयों में छिपा देते हैं यही स्थान इसके लिए सबसे उपयुक्त रहेगा।

🔵 सबकी राय खत्म हो जाने के बाद एक बुद्धिमान देवता ने कहा क्यों न हम मानव की चमत्कारिक शक्तियों को मानव -मन की गहराइयों में छिपा दें। चूँकि बचपन से ही उसका मन इधर -उधर दौड़ता रहता है, मनुष्य कभी कल्पना भी नहीं कर सकेगा कि ऐसी अदभुत और विलक्षण शक्तियां उसके भीतर छिपी हो सकती हैं। और वह इन्हें बाह्य जगत में खोजता रहेगा अतः इन बहुमूल्य शक्तियों को हम उसके मन की निचली तह में छिपा देंगे। बाकी सभी देवता भी इस प्रस्ताव पर सहमत हो गए। और ऐसा ही किया गया, मनुष्य के भीतर ही चमत्कारी शक्तियों का भण्डार छुपा दिया गया, इसलिए कहा जाता है मानव मवन में अद्भुत शक्तियां निहित हैं।

🔴 दोस्तों इस कहानी का सार यह है कि मानव मन असीम ऊर्जा का कोष है। इंसान जो भी चाहे वो हासिल कर सकता है। मनुष्य के लिए कुछ भी असाध्य नहीं है। लेकिन बड़े दुःख की बात है उसे स्वयं ही विश्वास नहीं होता कि उसके भीतर इतनी शक्तियां विद्यमान हैं। अपने अंदर की शक्तियों को पहचानिये, उन्हें पर्वत, गुफा या समुद्र में मत ढूंढिए बल्कि अपने अंदर खोजिए और अपनी शक्तियों को निखारिए। हथेलियों से अपनी आँखों को ढंककर अंधकार होने का शिकायत मत कीजिये। आँखें खोलिए, अपने भीतर झांकिए और अपनी अपार शक्तियों का प्रयोग कर अपना हर एक सपना पूरा कर डालिये।

15 टिप्‍पणियां:

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    1. चमत्कार !
      व्यक्ति स्वयं एक अदभुत चमत्कार हैं !

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  2. बात सही है लेकिन हार्ट अटैक या ब्रेन हम्राज हो सकता है

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  3. एकदम सही बात है.. हम सच्चे मन से सोचे तो सब कुछ मुमकिन है।

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  4. यह केवल आदर्शवादी कहावत है कि यह मनुष्य के लिये दुःख की बात है कि उसे स्वयं ही विश्वास नहीं होता कि उसके भीतर इतनी शक्तियां विद्यमान हैं। अपने अंदर की शक्तियों को पहचानिये, उन्हें पर्वत, गुफा या समुद्र में मत ढूंढिए बल्कि अपने अंदर खोजिए और अपनी शक्तियों को निखारिए।...... सत्य यह है कि कर्म और प्रयत्न तो करना चाहिये परन्तु जैसे बरगद ,आम ,बेर ,नीम ,कटहल ,गुलाब ,चमेली ,गेंदा आदि के बीज़ होते हैं और सबके पुष्पित ,पल्लवित होने की संभावनाएं अलग अलग और पूर्व निश्चित हैं वैसे ही प्रत्येक मनुष्य निश्चित रूप से अलग अलग क्षमता और संभावनाओं के साथ विकसित हो सकता है ,परन्तु हरगिज गीता के श्लोक .... मा फलेसु कदा .........का उल्लंघन कर मनमाना दिमागी चमत्कार नहीं प्राप्त कर सकता है ,बल्कि श्री कृष्ण जी के शब्दों मे मनुष्य केवल कर्म कर सकता है और कर्म फल की प्राप्ति जन्म जन्मांतरों के गहन कर्मों के लेखा जोखा के हिसाब के अधीन है .... कुछ लोग अनायास सुख और वैभव का आनन्द लेते रहते हैं और वहीं महान कर्मवादी जीवन भर इतने कष्ट भोगते रहते हैं कि ठीक से -जी भर कर परमात्मा को याद भी नहीं कर पाते हैं जबकि सदकर्म करने के अलावा जप ,भजन ,पूजन ,कर्मकाण्ड करना भी जरूरी होता है

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  5. यह केवल आदर्शवादी कहावत है कि यह मनुष्य के लिये दुःख की बात है कि उसे स्वयं ही विश्वास नहीं होता कि उसके भीतर इतनी शक्तियां विद्यमान हैं। अपने अंदर की शक्तियों को पहचानिये, उन्हें पर्वत, गुफा या समुद्र में मत ढूंढिए बल्कि अपने अंदर खोजिए और अपनी शक्तियों को निखारिए।...... सत्य यह है कि कर्म और प्रयत्न तो करना चाहिये परन्तु जैसे बरगद ,आम ,बेर ,नीम ,कटहल ,गुलाब ,चमेली ,गेंदा आदि के बीज़ होते हैं और सबके पुष्पित ,पल्लवित होने की संभावनाएं अलग अलग और पूर्व निश्चित हैं वैसे ही प्रत्येक मनुष्य निश्चित रूप से अलग अलग क्षमता और संभावनाओं के साथ विकसित हो सकता है ,परन्तु हरगिज गीता के श्लोक .... मा फलेसु कदा .........का उल्लंघन कर मनमाना दिमागी चमत्कार नहीं प्राप्त कर सकता है ,बल्कि श्री कृष्ण जी के शब्दों मे मनुष्य केवल कर्म कर सकता है और कर्म फल की प्राप्ति जन्म जन्मांतरों के गहन कर्मों के लेखा जोखा के हिसाब के अधीन है .... कुछ लोग अनायास सुख और वैभव का आनन्द लेते रहते हैं और वहीं महान कर्मवादी जीवन भर इतने कष्ट भोगते रहते हैं कि ठीक से -जी भर कर परमात्मा को याद भी नहीं कर पाते हैं जबकि सदकर्म करने के अलावा जप ,भजन ,पूजन ,कर्मकाण्ड करना भी जरूरी होता है

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